एेलोवेरा से कैसे करें डायबिटीज का इलाज, जानिए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की राय!

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसका समय रहते इलाज न किया जाए तो हार्ट अटैक के चांस बढ़ सकते हैं। इससे नर्व डैमेज और आंखों की रोशनी जा सकती है। डायबिटीज के खतरे को देखते हुए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट इसके इलाज के लिए एलोवेरा को फायदेमंद मानते हैं। इसीलिए हजारों सालों से एलोवेरा का यूज ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में होता है।

एलोवेरा में इमोडिन एलिमेंट्स होता है। यह बॉडी में मौजूद ग्लूकोज के लेवल को कम करने में मदद करता है। रोज एलोवेरा जूस पीने से म्युसिलेज और ग्लूकोमेनन फाइबर्स मिलते हैं। इससे भूख कम लगती है और वजन कंट्रोल रहता है। इसमें पाए जाने वाले एलिमेंट्स जैसे क्रोमियम और मैगनीज  बॉडी में इंसुलिन का लेवल बनाए रखते हैं। राजस्थान आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी, जोधपुर के असिस्टेंट प्रोफेसर  डॉ. अरुण दधीच  डायबिटीज के पेशेंट को रोज दो चम्मच एलोवेरा जूस पीने की सलाह देते हैं। उनके अनुसार  एलोवेरा जूस लिवर से संबंधित बीमारियों को दूर करता है। साथ ही यह इंसुलिन लेवल को कम करने में फायदेमंद है।

डायबिटीज मरीजों द्वारा एलोवेरा जूस  पीने के साथ ही इसे जेल के रूप में घाव पर लगाना भी इफेक्टिव होता है। आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों को एक बार चोट लग जाने के बाद घाव जल्दी नहीं भरते। ऐसे में अगर घाव पर एलोवेरा जूस लगा लें तो घाव जल्दी भरने लगता है और दर्द भी दूर होता है।

एलोवेरा में डायटरी फाइबर ग्लूकोमेनन होता है। यह पानी में आसानी से घुल जाता है जो बॉडी में ग्लूकोज के लेवल को कम करता है। यह हेमीसेल्यूलोज कंपोनेंट साथ ही एंथ्रोक्विनोंस और लेक्टिन्स  जैसे एलिमेंट्स, ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करते हैं। एक महीने तक एलोवेरा जूस पीने से डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल 50 तक कम हो सकता है। ऐलोवेरा से बॉडी के टॉक्सिन्स दूर होते हैं। इस तरह यह ब्लड में मौजूद ग्लूकोज की अधिक मात्रा को कम करने में भी फायदेमंद है। एलोवेरा में मौजूद फाइबर्स डाइजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी रखने में मदद करते हैं। डायबिटीज पेशेंट्स को अगर कब्ज की प्रॉब्लम है तो उसे ट्रीट करने में एलोवेरा फायदेमंद होता है। जोड़ों के दर्द और दांत दर्द ठीक करने में एलोवेरा को इफेक्टिव माना जाता है।

एलोवेरा में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं। यह डायबिटीज के दौरान होने वाली कॉमन हेल्थ प्रॉब्लम जैसे अल्सर, वाउंड्स और इन्फेक्शन से बचाता है। एलोवेरा बॉडी में इंसुलिन के सिक्रीशन को बढ़ाता है।  एलोवेरा में पाए जाने वाले नैचुरल एलिमेंट्स की वजह से  इसका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता है। महर्षि आयुर्वेदिक हॉस्पिटल, नई दिल्ली की डॉ. भानु शर्मा के अनुसार  डायबिटज के मरीजों को शुरूआत में सिर्फ एक चम्मच एलोवेरा जूस पीना चाहिए। कुछ दिनों तक जूस पीने के बाद इसकी मात्रा दो से तीन चम्मच तक बढ़ा सकते हैं। अगर आपको एलोवेरा जूस का टेस्ट पसंद न हो तो इसमें  शहद मिलाकर पी सकते हैं। अपने टेस्ट के अनुसार एलोवेरा जेल को अन्य जूस और स्मूदी में मिलाकर भी पी सकते हैं। कई लोगों को एलोवेरा लेने का यह तरीका ज्यादा पसंद आता है।

 

कैसे बनाएं एलोवेरा जूस : 

आवश्यक सामग्री : 
एलोवेरा की पत्ती – 1
चाकू
छोटा बाउल – 1
ब्लेंडर

पानी – आधा कप

बनाने का तरीका : 

एलोवेरा की पत्तियों को धोकर सबसे पहले उसके किनारे के कांटों को चाकू की सहायता से निकाल कर अलग कर दें | इसकी पहली लेयर को चाकू की मदद से अलग कर लें। एलोवेरा के सफेद भाग को अलग करने के बाद उसे ब्लेंडर में डालें और पानी मिला लें। इसे ब्लेंड करके गिलास में निकाल लें। एलोवेरा जूस का टेस्ट बढ़ाने के लिए इसमें नींबू या अदरक का रस मिला सकते हैं। चाहें तो इसे अन्य जूस में मिलाकर पी सकते हैं।

                                                                              Dr. Arun Dadhich

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