कलौंजी से कैसे करें डायबिटीज का इलाज, जानिए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की राय 

डायबिटीज को साइलेंट किलर कहा जाता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीज, किडनी प्रॉब्लम और अल्जाइमर जैसी बीमारियों की संभावना रहती है। आमतौर पर इसे कंट्रोल करने के लिए लोग एलोपैथिक दवाएं लेते हैं। लेकिन इस बीमारी का अगर आयुर्वेदिक इलाज भी किया जाए तो बेहद फायदेमंद साबित होता है। डायबिटीज में फायदेमंद ऐसी ही आयुर्वेदिक दवा है कलौंजी  जिसे आयुर्वेदिक डॉक्टर भी रिकमेंट करते हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सी आर यादव के अनुसार आज कल लोगों की डाइट से कलौंजी जैसी कड़वी चीजें जैसे गायब हो चुकी हैं। वे यह नहीं जानते कि लिवर और पेनक्रियाज को पूरी तरह काम करने के लिए इन चीजों की खास जरूरत होती है। वह बता रहे हैं डायबिटीज में कलौंजी को किस तरह लेने से फायदा होता है।
कलौंजी को दरदरा पीस कर एक मर्तबान में रख लें। रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच कलौंजी खाने से डायबिटीज कंट्रोल रहती है। जिन लोगों को कलौंजी का कड़वा टेस्ट पसंद न हो, वे इसे
शहद के साथ ले सकते हैं। कलौंजी को पीसकर इसका पाउडर बना लें और इसे नींबू के रस के साथ लें। इसके अलावा एक चम्मच कलौंजी को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इस
पानी को छानकर पीने से शुगर लेवल कंट्रोल होता है। किसी भी लेवल पर होने वाली शुगर में यह प्रयोग कारगर साबित होता है। रोज सुबह एक कप काली चाय में आधा चम्मच कलौंजी के तेल
को मिलाकर सुबह और शाम पीना भी डायबिटीज में फायदेमंद होता है।
दरअसल कलौंजी में फिक्स्ड ऑयल्स, अल्केलॉइड्स, थायमोक्विनॉन और थायमोहाइड्रोक्विनोन जैसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं। जर्नल ऑफ एथनोफॉर्मेकॉलॉजी में प्रकाशित स्टडी के अनुसार कलौंजी
आंतों में ग्लूकोज के अब्जॉर्बशन में मदद करती है। यह पेनक्रियाज में बीटा सेल्स को डैमेज होने से बचाती है। इन्हीं बीटा सेल्स से इंसुलिन का प्रोडक्शन होता है। इस तरह कलौंजी से टाइप 1
डायबिटीज का खतरा कम होता है। जर्नल ऑफ एंडोक्रायोनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक कलौंजी में पाए जाने वाला थायमोक्विनोन टाइप 1 डायबिटीज के रिस्क को
कम करने में मदद करता है। यह लिवर की सेल्स में इंसुलिन की सेंसेटिविटी को बढ़ाता है। इससे टाइप 2 डायबिटीज की संभावना कम होती है। कलौंजी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स के हार्मफुल इफेक्ट से पेनक्रियाज की सेल्स को बचाती हैं। आयुर्वेद एक्सपर्ट कलौंजी की तरह इसके तेल को भी डायबिटीज में इफेक्टिव मानते हैं। यह तेल डायबिटीज के साथ ही किडनी प्रॉब्लम और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इफेक्टिव है। इसके तेल में  थायमोक्विनोन के अलावा आइसोक्लिनोलिन अल्केलॉइड्स, पायरेजॉल अल्केलॉइड्स जैसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं। डॉ. सी आर यादव कहते हैं कि कलौंजी के आधा चम्मच तेल में कलौंजी के दाने, राई, अनार के छिलकों का पाउडर बनाकर लेने से भी शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। इसे रोज सुबह खाली पेट खाना ज्यादा फायदेमंद है।
Dr. C R Yadav
Dr. C R Yadav
कब न खाएं कलौंजी : 
वैसे तो कलौंजी डायबिटीज में फायदेमंद होती है लेकिन कुछ खास कंडिशंस में इसे अवॉयड करना चाहिए जैसे –
 
प्रेग्नेंसी में : प्रेग्नेंट महिलाओं को कलौंजी अवॉयड करना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स यूटेरस के कॉन्ट्रेक्शन को कम कर सकते हैं। साथ ही ब्रेस्ट फिडिंग करवाने वाली महिलाओं को कलौंजी नहीं खाना चाहिए। इससे मिल्क प्रोडक्शन कम हो सकता है।
लो ब्लड प्रेशर होने पर : लो ब्लड प्रेशर होने पर कलौंजी न खाएं।
मेडिसिन के साथ : कुछ दवाएं जैसे वारफेरिन, कोमेडिन और एस्पिरीन खा रहे हैं तो कलौंजी अवॉयड करें।
पीरियड्स प्रॉब्लम होने पर : कलौंजी से ब्लड पतला होता है। इसलिए अगर आपको पीरियड्स प्रॉब्लम है तो कलौंजी न खाएं। इससे प्रॉब्लम बढ़ सकती है।
सर्जरी होने पर : अगर आपकी सर्जरी हुई है तो कलौंजी न खाएं। इससे ब्लड पतला होता है जिससे डायबिटीक पेशेंट की प्रॉब्लम बढ़ सकती है।

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