भोज्य फाइबर -उच्च रक्त शर्करा स्तर का एक उपचार

भोज्य फाइबर जिसे चारा के रूप में भी जाना जाता है, पौधों का वह हिस्सा होता है जो हमारे शरीर पचा नहीं सकते हैं। दो प्रकार के भोज्य फाइबर होते हैं: घुलनशील भोज्य फाइबर और अघुलनशील भोज्य फाइबर।

हम कह सकते हैं कि घुलनशील भोज्य फाइबर नरम फाइबर हैं जो रक्त ग्लूकोज (शर्करा) को नियंत्रित करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। है। घुलनशील फाइबर ओट ब्रैन, दलिया, फलियां (सूखे बीन्स   और दालें ) और सेब, अमरूद, सपोटा (चीकू) जैसे फलों में मिल सकते हैं।

अघुलनशील भोज्य फाइबर भारी फाइबर होते हैं जो मूलत:  कब्ज रोकने में मदद करता है, पेट को साफ करने में। यह पाया जा सकता है गेहूं की भूसी, साबुत अनाज की रोटी, और अनाज, फल और सब्जियों में।

कई खाद्य पदार्थों में घुलनशील भोज्य फाइबर और अघुलनशील भोज्य फाइबर दोनों शामिल होते हैं।

भोज्य  फाइबर का महत्व

भोज्य फाइबर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसके कुछ फ़ायदों में शामिल हैं:

  • शर्करा स्तर पर नियंत्रण
  • रक्तचाप का प्रबंधन
  • रक्त कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए
  • भोजन तृप्ति  
  • वजन प्रबंधन
  • आँतों की गतिशीलता बनाए रखना

मधुमेह टाइप 2 में उच्च भोज्य फाइबर डाइट  

ओट ब्रैन, फलियों, सभी प्रकार के सूखे बीन्स,  मटर, और दाल, और सेब जैसे फल एवं मूल वाली सब्जियों जैसे गाजर में पाया जाने वाला घुलनशील भोज्य  फाइबर, मधुमेह वाले लोगों के लिए विशेष रूप से सहायक माना जाता है। घुलनशील भोज्य फाइबर से पेट खाली होने में देर होती है जिससे रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि रक्त प्रवाह में ग्लूकोज देर से प्रविष्ट होता है और भोजन बाद की रक्त शर्करा में वृद्धि कम हो सकती है। किसी  व्यक्ति में रक्त ग्लूकोज या चीनी के स्तर में हमेशा बढ़ोतरी से टाइप 2 मधुमेह हो सकता है, जो आम तौर पर 40 की उम्र के बाद होता है और स्ट्रोक तथा हृदय रोग का जोखिम दोगुना करता है। घुलनशील फाइबर के कोलेस्ट्रॉल-कम करने वाले प्रभाव से मधुमेह वाले लोगों को दिल की बीमारी का जोखिम कम करने में भी मदद मिल सकती है।

फाइबर सेवन बढ़ाने के लिए युक्तियाँ

फाइबर सेवन बढ़ाने के लिए यहां हमारे आहार विशेषज्ञ द्वारा कुछ सुझाव दिए गए हैं:

  • सब्जियां और फल छिलके सहित खाएं
  • अधिक साबुत अनाज वाली रोटी, पास्ता, सीरीयल, क्रैकर्स और चावल खाएँ।
  • अपने दैनिक आहार में साबुत अनाज के आटे का प्रयोग करें।
  • सूप और सलाद में जौ, सेम, और मसूर मिलाएँ
  • रस के बजाए ताजे फल अधिक खाएं।
  • फ्लेक्स बीज खाएँ।
  • भीगे हुए सूखे मेवे खाएँ।

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