कॉफी पीने का मधुमेह पर क्या असर होता है?

हम में से कई लोगों के लिए कॉफी हमेशा एक पसंदीदा पेय पदार्थ रहा है !  वास्तव में, कुछ लोगों के लिए, यह एक ही तरीका है दिन शुरू  करने का और दूसरों के लिए एक कप कॉफी जरूरी है दिन भर का लंबा समय काम पर बिताने के बाद तनाव दूर  करने के लिए।

लेकिन यह जानते हुए कि कॉफी में कैफीन होता है जो हमारे स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है, यह पता करना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि यह हमारे लिए अच्छा है या बुरा। मधुमेह के रोगियों के लिए यह और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उन्हें एक सख्त आहार  अनुशासन बनाए रखना जरुरी होता है।  उनके लिए, न केवल भोजन, लेकिन वे क्या पेय पदार्थ लेते हैं वह भी समान रूप से महत्वपूर्ण है ।

अतीत में विभिन्न शोध से पता चला है कि कॉफी और मधुमेह  का अच्छा तालमेल नहीं होता और अन्य अध्ययनों से पता चलता है कि कॉफी पीने वालों को दूसरों की तुलना में मधुमेह का खतरा कम  होता है।

“हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ  के एक अध्ययन से पता चला कि जिन लोगों ने चार साल की अवधि के लिए प्रति दिन एक से अधिक कप तक कॉफी की मात्रा में वृद्धि  की, उनमें  टाइप 2 मधुमेह का 11 प्रतिशत कम जोखिम था उनकी तुलना में जिन्होंने अपने कॉफी  के सेवन की मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं किया।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन लोगों ने अपने कॉफी के सेवन में प्रति दिन एक से अधिक कप की कमी की, उनमें टाइप 2 मधुमेह विकसित होने की संभावना १७ प्रतिशत बढ़ गई।”

अध्ययनों से यह भी संकेत मिलता है कि कॉफी हमेशा समान तरीके से लोगों को प्रभावित नहीं करती है। इसके अलावा, जिनमें मधुमेह विकसित नहीं हुआ है उनके लिए कॉफी सुरक्षात्मक हो सकती  है, लेकिन जो लोग पहले से ही प्रकार 2 मधुमेह से ग्रस्त हैं,  उनमें कॉफी का प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है।

इस सबसे हमें निश्चित रूप से हमें एक महत्वपूर्ण सवाल की ओर देखना होगा कि, ” क्या मधुमेह से ग्रस्त लोगों को कॉफी पीना चाहिए”? आइए देखें, कॉफी कैसे मधुमेह के रोगियों को लाभ और को नुकसान पहुंचा सकती है!

 कॉफी के लाभ

जो लोग बहुत कॉफी पीते हैं उन्हें  मधुमेह का जोखिम काम होता है । (स्रोत: WebMD) । इसी तरह, अन्य शोध से भी संकेत मिलता है कि कॉफी हृदय रोगों, कैंसर,  पार्किंसंस रोग और प्रकार 2 मधुमेह जैसे रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

इसके अलावा, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अमेरिकियों के लिए 2015-2020 के लिए जो आहार सिफारिश के दिशानिर्देश जारी की हैं, उनमें कहा गया है कि कॉफी के 3-5 कप पीना स्वास्थ्य लाभ के साथ जुड़ा हुआ है ((प्रकार 2 मधुमेह सहित)।

जब हम कॉफी और मधुमेह के बारे में बात करते हैं, हम आम तौर पर इसे  कैफीन  से जोड़ते हैं।  निस्संदेह कैफीन मधुमेह रोगियों के लिए बुरा है। लेकिन, कॉफी सिर्फ कैफीन नहीं है । कॉफी में अन्य घटक होते हैं जो डायबिटीज के लिए अच्छे होते हैं।

कॉफी में  पॉलीफेनोल्स होते हैं, जिनमें एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। व्यापक रूप से माना जाता है कि ये गुण प्रकार 2 मधुमेह को रोकने में मदद करते हैं।

कॉफी में मैग्नीशियम और क्रोमियम खनिज शामिल होते हैं। अधिक मैग्नीशियम का सेवन प्रकार 2 मधुमेह की कम दरों के साथ जोड़ा गया है।

इन पोषक तत्वों का मिश्रण इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार के लिए सहायक हो सकता है ।

डिकैफ़िनेटेड कॉफी रक्त शर्करा को बढ़ाती नहीं लगती।

कॉफी के हानिकारक प्रभाव

अधिकांश स्वस्थ युवा वयस्कों के लिए, कॉफी में कैफीन रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाती  प्रतीत नहीं होती है । लेकिन, मधुमेह के रोगियों के लिए, मामला अलग हो सकता है। कैफीन (एक दवा है जो कि एक उत्तेजक हो सकता है और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की गति बढा सकते हैं) अल्पावधि में इंसुलिन को निष्क्रिय कर सकता है।

कॉफी में कैफीन ग्लूकोज और इंसुलिन दोनों का स्तर बढ़ाता है । इस वजह से मधुमेह के रोगियों को कॉफी पीते समय  सतर्क रहना चाहिए। “डायबिटीज़ केयर” में २००४ में प्रकाशित एक अध्ययन मे कहा गया था कि खाने से पहले कैफीन की एक खुराक से प्रकार 2 मधुमेह वाले लोगों में भोजन -बाद रक्त ग्लूकोज का स्तर ऊंचा पाया गया।

चीनी, क्रीम या दूध की तरह मिलाई गई सामग्री के साथ वाली कॉफी मधुमेह रोगियों के लिए हानिकारक प्रभाव रख सकती है। जब हम कॉफी में मिठास मिलाते हैं तो यह मधुमेह की रोकथाम के लाभों को  खत्म कर देती है। वास्तव में इससे मधुमेह के विकास का  जोखिम  बढ़ जाता है। ये आपकी  कॉफी में अस्वास्थ्यकर  कार्बोहाइड्रेट और उच्च कैलोरी  भर सकते हैं। इससे कॉफी के अच्छे प्रभाव का पलड़ा हल्का हो सकता है।

लंबे समय तक कैफीन वाली कॉफी पीने से ग्लूकोज और इंसुलिन संवेदनशीलता पर इसके प्रभाव मैं बदलाव आ सकता है।  दरअसल, अधिक संतृप्त वसा, उच्च कार्बोहाइड्रेट  वाली कॉफी नियमित आधार पर पीने से  इंसुलिन प्रतिरोध निर्मित  हो सकता है। यह अंततः टाइप 2 मधुमेह मैं योगदान दे सकता है।

व्यायाम के दौरान कैफीन रक्त शर्करा के स्तर को कम करती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब प्रकार 2 मधुमेह वाले लोग व्यायाम करने से पहले  कैफीन का उपयोग करते हैं तो यह  उनके रक्त शर्करा का स्तर और कम करती है।  यह खतरनाक हो सकता है अगर आप इंसुलिन पर हैं और आपके रक्त शर्करा के अधिक गिर जाने का खतरा है।

 कुल मतलब

कॉफी  पीने में संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। लेकिन, कई बार कॉफी का एक कप भी कुछ लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकता है। इसका कारण यह है कि कैफीन कैसे लोगों को प्रभावित करती है, उसमें  शरीर का द्रव्यमान, उम्र, दवाएँ और स्वास्थ्य की स्थितियाँ भी भूमिका निभाती हैं। यही कारण है कि मधुमेह वाले सभी लोगों को एक ही समूह में वर्गीकृत करना कठिन है और यह कहना है कि कॉफी  पीना अच्छा है या बुरा।

तो, यदि आपको मधुमेह है तो अपने आहार में कोई परिवर्तन करने से पहले हमेशा अपने चिकित्सक से परामर्श किया करें।

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