कहीं आपके बच्चे को डायबिटीज तो नहीं? जानिए कैसे पहचानें इसे 

आमतौर पर लोगों का यह मानना है कि डायबिटीज जेनेटिक होती है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ डायबिटीज की संभावना बढ़ती है। लेकिन यह बीमारी बड़ी उम्र में ही नहीं बल्कि बचपन में भी हो सकती है। बचपन से बच्चों के खानपान की गलत आदतों की वजह से इस बीमारी की संभावना बढ़ती है। साथ ही जंक फूड ज्यादा खाने, फिजिकल एक्टिविटी न करनें, टेंशन में रहने या टीवी और कंप्यूटर के सामने लंबे समय तक बैठने से बच्चों में डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है। दरअसरल डायबिटीज होने पर बॉडी में बीटा सेल्स खत्म होने लगती हैं। इससे इंसुलिन बनना बंद हो जाता है और शुगर लेवल बढ़ने लगता है। ब्रिटेन में लंदन की सेंट जॉर्जेस यूनिवर्सिटी द्वारा की गई रिसर्च के अनुसार जो बच्चे पर्याप्त नींद लेते हैं उन्हें डायबिटीज की संभावना कम होती है। डायबेटोलॉजिस्ट और गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में एंडोक्रायनोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसरडॉ. मनुज शर्मा कहते है कि अगर आपके बच्चे को बार-बार भूख लगती है या यूरिन ज्यादा आता है तो ये डायबिटीज के संकेत हो सकते हैं। बच्चों में यह लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय रहते बच्चे का इलाज न होने पर उसकी आंखों की रोशनी कम हो सकती है या किडनी पर इसका निगेटिव इफेक्ट हो सकता है।  डॉ. मनुज शर्मा से जानें बच्चों में डायबिटीज के लक्षण :

Dr. Manuj Sharma
Dr. Manuj Sharma

बार-बार भूख लगना : डायबिटीज होने पर शुगर लेवल बढ़ता है जिससे बार-बार भूख और प्यास लगती है। कई बार ऐसे बच्चों को बार-बार कोल्ड ड्रिंक पीने का मन होता है।

ज्यादा पेशाब आना : अगर बच्चा पानी ज्यादा पीता है तो उसे बार-बार पेशाब करने के लिए जाना होता है। कई बार पेशाब इतना ज्यादा होता है कि टीनएज बच्चों में भी बेड वेटिंग की प्रॉब्लम हो सकती है। ऐसे संकेत मिलने पर पेरेंट्स को तुरंत सावधान हो जाना चाहिए।

वेट लॉस : डायबिटीज होने पर मसल्स के टिशूज सिकुड़ते हैं। इससे ज्यादा खाने के बाद भी बॉडी में फैट स्टोर नहीं होता है और वजन कम होने लगता है। डायबेटोलॉजिस्ट इसे बच्चों में डायबिटीज का पहला संकेत मानते हैं।

कमजोरी : बॉडी में शुगर की कमी होने से बच्चे जल्दी थकान महसूस करते हैं। उन्हें हर वक्त कमजोरी महसूस होती है।

चिढ़चिढ़ापन या ज्यादा गुस्सा आना : बॉडी में इंसुलिन लेवल कम होने से बच्चे चिढ़चिढ़े हो जाते हैं। उन्हें छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है। बच्चों के नेचर में चेंज होने का निगेटिव असर उनके स्कूल परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है।

बच्चे को डायबिटीज होने पर पेरेंट्स रखें इन बातों का ख्याल : 

अगर आपके बच्चे को डायबिटीज डाइग्नोज हुआ है तो इस बारे में उससे खुलकर बात करें। कई पेरेंट्स इस बीमारी को बच्चे से छिपाकर रखते हैं। इससे परेशानियां बढ़ती हैं। अगर बच्चा अपनी बीमारी से जुड़े कोई सवाल आपसे करें तो उसे नंजरअंदाज करने के बजाय उससे खुलकर बात करें। इससे बच्चे को अपने मन में आए हर सवाल का जवाब मिलेगा। बच्चे को तीन घंटे से ज्यादा देर तक टीवी न देखने दें। ज्यादा देर तक टीवी या मोबाइल पर समय बिताने से बॉडी में फैट और इंसुलिन की इम्युनिटी पॉवर का बैलेंस बिगड़ता है। इससे डायबिटीज बढ़ती है।

डायबिटीज होने पर अगर बच्चा बेड वेटिंग से परेशान है तो उसे डांटे नहीं बल्कि उसकी हेल्थ प्रॉब्लम को समझने का प्रयास करें। बच्चों का समय-समय पर ब्लड शुगर टेस्ट करवाएं और उसके अनुसार इंसुलिन दिलवाते रहें। बच्चे को उसकी रूचि के अनुसार फिजिकल एक्टिविटी में शामिल करें। उसे दूसरे बच्चों से अलग रखने या आराम करने की सलाह न दें। इसका निगेटिव असर उसके बिहेवियर पर हो सकता है। अपने बच्चे के साथ ही परिवार के हर सदस्य के लिए हेल्दी फूड घर में ही बनाएं। इससे बच्चा खुद को अलग-थलग मेहसूस नहीं करेगा।

 

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